‘परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामलों में दोषसिद्धि के लिए श्रंखला का पूरा होना ज़रूरी’ सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि और सजा को किया रद्द

‘परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामलों में दोषसिद्धि के लिए श्रंखला का पूरा होना ज़रूरी’ सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की दोषसिद्धि और सजा को किया रद्द

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  • June 20, 2023
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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 2010 में आरोपी की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को रद्द किये जाने का आदेश दिया है।

इस मामले में कोर्ट परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहा था।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस एहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों को श्रंखला की तीन कड़ियों (उद्देश्य, अंतिम बार देखा गया सिद्धांत और हथियार की बरामदगी) को स्थापित करना होता है।

कोर्ट ने शरद बिरधीचंद सारदा बनाम स्टेट ऑफ़ महाराष्ट्र और शैलेन्द्र राजदेव पासवान बनाम स्टेट ऑफ़ गुजरात में सुप्रीम के आदेश के सन्दर्भ में इस बात को दोहराया कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के मामले में श्रंखला सभी प्रकार से पूरी होनी चाहिए ताकि आरोपी के अपराध को इंगित किया जा सके और साथ ही अपराध के किसी अन्य सिद्धांत को ख़ारिज किया जा सके।

कोर्ट ने यह देखते हुए कि हाई कोर्ट ने अपने आदेश में उद्देश्य और लास्ट सीन सिद्धांत के निष्कर्ष पर सहमति जताई थी लेकिन हथियार और खून से सने कपडे की बरामदगी को अमान्य करार दिया था।

कोर्ट ने कहा कि हालांकि हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि इस मामले बरामदगी इस ओर इशारा नहीं करती कि आरोपी ने अपराध किया है उसके बावजूद कोर्ट ने दोषसिद्धि की पृष्टि की थी।

कोर्ट ने कहा कि ” हमें नहीं लगता कि हाई कोर्ट का यह निष्कर्ष सख्ती से कानून के अनुरूप है। कोर्ट ने अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और सजा को रद्द किये जाने का आदेश दिया।

केस टाइटल : LAXMAN PRASAD @ LAXMAN VERSUS THE STATE OF MADHYA PRADESH CRIMINAL APPEAL                            NO(S). 821/2012

आदेश यहाँ पढ़ें –

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