असंज्ञेय अपराध में छापे से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति ज़रूरी, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सट्टा खेलने के आरोप में दर्ज एफ आई आर को रद्द करने का दिया आदेश

असंज्ञेय अपराध में छापे से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति ज़रूरी, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सट्टा खेलने के आरोप में दर्ज एफ आई आर को रद्द करने का दिया आदेश

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  • December 10, 2022
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में असंज्ञेय अपराध में छापे के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति को ज़रूरी बताया है।

इस मामले में पुलिस ने जालंधर के सौरभ वर्मा के घर 25 जुलाई 2020 को छापा मार कर सवा करोड़ रूपये,लैपटॉप और मोबाइल बरामद किया था।

मामले में आरोपी सौरभ वर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कोर्ट से एफ आई आर रद्द करने की मांग की थी।

याची ने कोर्ट को बताया था कि पुलिस ने उसके घर छापा मारा था और सट्टा खेलने के आरोप में उसके खिलाफ एफ आई दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

याची ने कोर्ट से कहा था कि छापे की कार्रवाई पुलिस ने बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति प्राप्त किये की थी, वहीँ पुलिस का कहना था कि बड़ी मात्रा में याची के पास से कैश बरामद किया गया था और मौके पर याची को पकड़ा गया था।

कोर्ट ने माना कि इस मामले में पुलिस ने तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई नहीं की है।

कोर्ट ने याची के खिलाफ दर्ज एफ आई आर को रद्द करने का आदेश देते हुए कहा कि हर मामले में जांच का तरीक़ा अलग होता है।

कोर्ट ने कहा कि जुआं खेलना असंज्ञेय अपराध है ऐसे में किसी भी कार्रवाई से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना ज़रूरी है।

कोर्ट ने तय प्रक्रिया के पालन में पुलिस के स्तर पर पाई गई खामियों को आधार बना कर एफ आई को रद्द करने का आदेश दिया है।

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