दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी अफ़्रीकी और बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट के सत्यापन की मांग करने वाली याचिका को नस्लवादी बता ख़ारिज किया
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- December 7, 2022
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दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका को ख़ारिज कर दिया जिसमे दिल्ली में रहने वाले सभी अफ़्रीकी और बांग्लादेशी नागरिकों पर ड्रग पेडलर्स का आरोप लगाते हुए उनके पासपोर्ट के सत्यापन की मांग की गई थी।
चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमनियम प्रसाद की पीठ ने याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि किसी देश या महादीप के लोगों को व्यापक रूप से ड्रग पेडलर बताना नस्लवादी हो सकता है।
इस मामले में अधिवक्ता सुशील कुमार जैन ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि नशीली दवाओं की तस्करी ज़्यादातर अफ़्रीकी नागरिकों द्वारा की जाती है जिस से युवा पीढ़ी प्रभावित होती है और उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया था कि इन विदेशी नागरिकों के पास क़ानूनी रूप से भारत में रहने के लिए कोई वैध वीज़ा या पासपोर्ट भी नहीं होता है।
याचिका में कहा गया था कि यह विदेशी नागरिक दिल्ली में किरायेदार के रूप में रहते हैं, इनके मकान मालिक बिना किसी उचित सत्यापन के पैसों की खातिर आसानी से उन्हें समायोजित करते हैं।
याची का का तर्क था कि मकान मालिकों की इस आदत से आतंकवादी हमारे देश में काम कर सकते हैं और आसानी से दिल्ली और देश के अन्य भागों में अपने नापाक मंसूबों में सफल हो सकते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया था कि बहुत से विदेशी नागरिक स्टूडेंट और मेडिकल वीज़ा प्राप्त कर ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों में शामिल होते हैं।
पीठ ने याचिका को ख़ारिज करते हुए कहा कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है और न ही याची द्वारा इस पर कोई शोध किया गया है।
कोर्ट ने माना कि इन आरोपों को नस्लवादी कहा जा सकता है। वे लोग भी इंसान हैं और उनके पास वैध पासपोर्ट हैं।