कुश्ती खिलाडियों के यौन उत्पीड़न का मामला : ब्रजभूषण शरण सिंह के मामले को पॉक्सो कोर्ट में ट्रांसफर किये जाने की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस
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- May 30, 2023
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दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अपने रजिस्ट्रार जनरल और दिल्ली सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को उस याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमे कोर्ट से पूछा गया है कि कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष ब्रजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कुश्ती खिलाडियों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों का मामला किस कोर्ट में चलेगा।
दिल्ली हाई कोर्ट में कुश्ती खिलाडियों ने याचिका दायर कर सिंह आरोपों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले को एमपी / एमएलए कोर्ट से पॉक्सो कोर्ट ट्रांसफर किये जाने की मांग की है।
ग़ौरतलब है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामले राउज़ ऐवेन्यू कोर्ट में चलते हैं। जबकि पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराधों के लिए प्रासंगिक अधिकार क्षेत्र वाली कोर्ट पटियाला हाउस है।
सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत कुश्ती खिलाडियों की ओर से राउज़ ऐवेन्यू कोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई थीं। एक याचिका नाबालिग कुश्ती खिलाडियों द्वारा दायर की गई थी जबकि दूसरी वयस्क खिलाडियों द्वारा दायर की गई थी।
खिलाडियों ने याचिका दायर कर यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग की थी।
एडिशनल चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (ACMM) ने वयस्क कुश्ती खिलाडियों की याचिका पर नोटिस जारी किया था जबकि नाबालिग खिलाडियों की याचिका को हाईकोर्ट भेज दिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल औऱ दिल्ली सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को इस मामले में नोटिस जारी कर 6 जुलाई तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
ग़ौरतलब है कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष सांसद ब्रजभूषण चरण सिंह के खिलाफ देश की नामचीन कुश्ती खिलाडियों ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जिसके बाद दिल्ली पुलिस द्वारा सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज न किये जाने पर यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप में एफआईआर दर्ज की थी।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में एफआईआर दर्ज करने औऱ मामले में जांच किये जाने के साथ साथ बयान दर्ज किये जाने के बारे में सूचित किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के आश्वासन के बाद मामले में आगे की कार्यवाही को बंद करते हुए खिलाडियों को अन्य किसी राहत के लिए उचित न्यायिक अदालत या हाई कोर्ट जाने को कहा था।