लिव इन रिलेशनशिप पर इलाहबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कहा मर्ज़ी से एक साथ रहने का संवैधानिक अधिकार
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- November 22, 2022
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इलाहबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में लिव इन रिलेशनशिप की वैधता पर मुहर लगा दी है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दो बालिग़ जोड़ों को अपनी मर्ज़ी से जीवन गुज़ारने का संवैधानिक अधिकार है। उनके जीवन में किसी दूसरे को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।
जस्टिस सुनीत कुमार और जस्टिस सैय्यद वैज मियां की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।
हाई कोर्ट ने यह आदेश आकाश राजभर और अन्य द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शाफीन जहाँ बनाम अशोकन के एम के मामले का हवाला देते हुए दर्ज एफ आई आर को रद्द करने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे याचियों के खिलाफ बलिया के नरही थाने में दर्ज एफ आई आर को रद्द करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने माना कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता बिना किसी क़ानूनी अधिकार के नहीं छीनी जा सकती है। दो बालिग़ जोड़ों को अपनी मर्ज़ी से जीवन साथी चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह उनके इस अधिकार की सुरक्षा करे।