सेवानिवृत्ति के 4 साल बाद कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

सेवानिवृत्ति के 4 साल बाद कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

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  • May 9, 2023
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में आदेश पारित कर एक अवकाश प्राप्त सरकारी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही को रद्द करने का आदेश दिया है।

जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने माना है कि नौकरी से अवकाश प्राप्त कर लेने के 4 साल बाद किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की जा सकती है।

कोर्ट के समक्ष लोक निर्माण विभाग के एक पूर्व कर्मचारी ने अपील दायर कर विभाग के सचिव द्वारा 18 नवंबर 2021 को पारित एक आदेश को चुनौती दी थी।

अपीलकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही के पश्चात् सजा के रूप में 5 साल की अवधि के लिए उसकी पेंशन से 5% प्रतिमाह कटौती करने का निर्देश दिया गया था।

इस मामले में अपीलकर्ता उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग से 31 दिसंबर 2011 को मुख्य अभियंता के पद से सेवा निवृत्त हुआ था।

अपीलकर्ता 26 नवंबर 2006 से 30 दिसंबर 2011 की अवधि में यूपी राजकीय निर्माण निगम और लोक निर्माण विभाग में पदोन्नत होकर विभिन्न पदों पर कार्यक्रत था। जिसके बाद 31 दिसंबर 2011 को मुख्य अभियंता के पद से सेवा निवृत्त हुआ था।

अपीलकर्ता पर आरोप था कि उसने राजकीय निर्माण निगम में कार्य करते हुए 2006 से 2011 की अवधि में तत्कालीन राज्य सरकार की स्मारकों के निर्माण से संबंधित पसंदीदा परियोजना को लागु करने में अनियमितता की थी जिसके कारण सरकारी कोष को भारी नुकसान हुआ था।

अपीलकर्ता के पक्ष में वकील ने अपनी प्रस्तुति में कहा था कि “उत्तर प्रदेश में लागु सिविल सेवा विनियम के प्रावधान 351A के तहत
याचिकाकर्ता के खिलाफ उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख से चार साल से अधिक समय के बाद विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती और जब विभागीय कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती थी तो सजा का आदेश अमान्य है।”

वहीँ सरकारी पक्षकार ने अपीलकर्ता की याचिका का विरोध तो किया लेकिन वह क़ानूनी और तथ्यात्मक स्थिति पर तर्क नहीं दे सके।

कोर्ट ने माना कि हालाकि इस मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही राज्यपाल की अनुमति प्राप्त कर लेने के बाद की गई लेकिन आरोप पत्र याचिकाकर्ता को उसकी सेवानिवृत्ति के 4 साल से भी अधिक समय के बाद जारी हुआ।

कोर्ट ने सिविल सेवा विनियमों के विनियम 351A का हवाला देकर कहा कि राज्यपाल किसी घटना की विभागीय कार्यवाही के संबंध में स्वीकृति प्रदान करेंगे, जो ऐसी कार्यवाही की शुरुआत से चार साल से अधिक पहले न घटित हुई हो।

कोर्ट ने माना कि इस मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप पत्र 27/28 जनवरी 2016 को जारी किया गया जबकि वह 31 दिसंबर 2011 को सेवानिवृत्ति हो चूका था जो कि सिविल सेवा विनियमों के विनियम 351A के तहत निर्धारित अवधि 4 साल से अधिक है।

कोर्ट ने उक्त विनियम में निर्धारित समय अवधि को याचिकाकर्ता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही में अवरोधक मानते हुए लोक निर्माण विभाग के आदेश को रद्द किये जाने का आदेश पारित किया।

केस टाइटल : सुरेंद्र कुमार त्यागी बनाम स्टेट ऑफ़ उत्तर प्रदेश

पूरा आदेश यहाँ पढ़ें :-

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