OBC जाति की सिंगल मदर को उसके बच्चों के लिए जाति प्रमाण पत्र से इंकार भेदभाव पूर्ण: दिल्ली हाईकोर्ट
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- November 23, 2022
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दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित अकेली माँ (सिंगल मदर) के बच्चों को जाति प्रमाण पत्र से इंकार स्पष्ट रूप से मनमाना और भेदभाव पूर्ण लगता है।
दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस यशवंत वर्मा की एकल पीठ ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ बी सी) जाति से संबंधित अकेली माँ (सिंगल मदर) की याचिका की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया अवलोकन किया है।
याचिका में माँ द्वारा अपने दो बच्चों को उसकी जाति के आधार पर ओ बी सी प्रमाण पत्र जारी करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।
ग़ौरतलब है कि दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार अकेली माँ की जाति प्रमाण पत्र के आधार पर ओ बी सी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता है। इस के लिए आवेदन के साथ माता पिता के जाति प्रमाण पत्र की प्रस्तुति आवश्यक है।
प्रतिवादी की ओर से प्रस्तुति में कहा गया है कि दिल्ली सरकार इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय अभी तक नहीं ले सकी है और इस मामले में केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण माँगा गया है।
प्रस्तुति में यह भी कहा गया है कि केंद्र द्वारा जारी परिपत्र के सन्दर्भ में ये मुद्दा उठता है जिसके अनुसार इस लाभ की अनुमति सिर्फ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित अकेली माँ को दी जा सकती है।
मामले में केंद्र सरकार के निर्णय पर दिल्ली सरकार के निर्भर होने पर सवाल करते हुए जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि “एक अकेली माँ जो निर्विवाद रूप से ओ बी सी जाति से संबंधित है अगर वह अपने बच्चों के लिए ओ बी सी प्रमाण पत्र की मांग करती है तो उसे मना क्यों किया जाता है?”
जस्टिस वर्मा ने कहा कि “अगर किसी विशेष वर्ग को ओ बी सी की मान्यता देने की शक्ति आप के पास है तो प्रमाण पत्र जारी करने का विचार भी आप ही को करना है।”
इस पर दिल्ली सरकार के अधिवक्ता का कहना था कि इस मामले को दिल्ली विधान सभा में भी उठाया गया था, हो सकता है कि सरकार इस मामले में कोई निति बनाने की प्रक्रिया में हो लेकिन मुझे इसका अंतिम उत्तर मिल जाएगा।
ग़ौरतलब है इस साल मार्च में दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग ने एक महिला के आवेदन को यह कह कर अस्वीकार कर दिया था कि अकेली माँ की जाति के आधार पर ओ बी सी प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा सकता है।