आरोपी के मकान पर बुलडोज़र चलाने की कार्रवाई पर गुवाहाटी हाईकोर्ट सख़्त
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- November 19, 2022
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गुवाहाटी हाई कोर्ट ने गुरुवार को जांच की आड़ में आरोपियों के घरों पर बुलडोज़र चलाने की प्रवृत्ति पर कड़ी चिंता व्यक्त की है।
हाई कोर्ट ने एक पुलिस अधीक्षक द्वारा इस तरह की कार्रवाई का स्वतः संज्ञान लेते हुए अहम् टिप्पणी की है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर एम छाया और जस्टिस सौमित्रा सैकिया की पीठ ने राज्य से इस संबंध में स्पष्टीकरण माँगा है।
पीठ ने कहा कि कानून के किस प्रावधान के तहत मकानों पर बुलडोज़र चलाने की अनुमति दी गई है।
जस्टिस छाया ने कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों की जांच में भी मकान गिराने की कार्रवाई किसी क़ानूनी दायरे में नहीं आती है।
जस्टिस छाया ने बुलडोज़र से आरोपियों के मकान गिराए जाने पर सख्त आपत्ति जताते हुए सरकारी अधिवक्ता से कहा कि “आप हमें ऐसा कोई आपराधिक क़ानून दिखाएँ जिसमे अपराध की जांच के लिए बग़ैर किसी आदेश के किसी पर बुलडोज़र चलाया जा सकता है?”
जस्टिस छाया ने कहा कि केवल इस लिए कि वे पुलिस विभाग के प्रमुख है वे किसी का मकान नहीं तोड़ सकते, इस तरह की कार्रवाई की अनुमति दी गई तो इस देश में कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस जांच की आड़ में किसी को उसके घर से बेदखल नहीं कर सकती है।
जस्टिस छाया ने बुलडोज़र चलाने की कार्रवाई की तुलना गैंगवार से करते हुए राज्य के गृह विभाग को जांच के बेहतर तरीके तलाशने का निर्देश दिया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 13 दिसंबर को होगी।
क्या है मामला?
इस मामले में एक 39 वर्षीय युवक की पुलिस हिरासत में मौत के बाद नगांव जिला (असम) के बटद्रवा पुलिस थाने में लोगों ने आग लगा दी थी।
आगज़नी की इस घटना के पांच आरोपियों के घर पर पुलिस अधीक्षक ने बुलडोज़र चलाने का आदेश दिया था।