हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तुरंत कार्रवाई करने का आदेश
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- October 22, 2022
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश में बढ़ते हुए घृणास्पद भाषणों पर चिंता जताते हुए सख्त टिप्पणी की है।
कोर्ट ने गुरुवार को भारत में समुदाय विशेष को निशाना बनाने औऱ आतंकित करने के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र औऱ राज्यों से जवाब माँगा था।
जस्टिस के एम जोसफ औऱ जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने हेट स्पीच से संबंधित एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि “भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और नागरिकों के बीच भाईचारे की परिकल्पना करता है जो व्यक्ति की गरिमा को सुनिश्चित करता है। राष्ट्र की एकता और अखंडता प्रस्तावना में निहित मार्गदर्शक सिद्धांतों में से एक है।”
जब तक विभिन्न धर्मो के लोग सदभाव में रहने में सक्षम नहीं होंगे तब तक कोई भाई चारा नहीं हो सकता है।
शीर्ष न्यायालय ने कहा कि हमें लगता है कि ” इस कोर्ट को मौलिक अधिकारों की रक्षा के साथ साथ संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्र के धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक चरित्र विशेष रूप से कानून के शासन की रक्षा और सेवा करने का कर्तव्य सौंपा गया है।
याचिका में शीर्ष अदालत से केंद्र और राज्यों को देश भर में घृणा अपराधों और घृणास्पद भाषणों से संबंधित घटनाओं की विश्वसनीय जांच शुरू करने का निर्देश देने की मांग की थी।
याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया था कि विभिन्न दंडात्मक प्रावधानों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गयी है, औऱ संवैधानिक सिद्धांतों के ख्याल रखने की ज़रूरत है।
कोर्ट ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर इस तरह की घटनाओं में उनके द्वारा की गयी कार्रवाइयों की रिपोर्ट मांगी है।
कोर्ट ने अधिकारीयों को निर्देश दिया है कि जहाँ कहीं भी ऐसी घटनाएं या भाषण होते है जिसमे आई पी सी की धाराओं 153A, 153B, 295A और 505 में मामला बनता है बिना किसी औपचारिक शिकायत के दर्ज होने का इन्तिज़ार किये स्वतः संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
कोर्ट ने अधिकारयों से कहा कि ऐसे मामलों में या तो खुद से कार्रवाई करें या अवमानना के आरोपों का सामना करने को तैयार रहें। कोर्ट ने कहा कि यदि अधिकारी कार्रवाई करने में विफल रहते हैं तो अवमानना शुरू की जाएगी।
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