राजद्रोह का कानून : विधि आयोग ने केंद्र सरकार को सौंपी रिपोर्ट, सजा में वृद्धि सहित आईपीसी की धारा 124A को बरक़रार रखने की सिफारिश
- Hindi
- June 2, 2023
- No Comment
- 1352
22वें विधि आयोग ने राजद्रोह को अपराध घोषित करने वाली आईपीसी की धारा 124A को कुछ संशोधन के साथ बरक़रार रखने की सिफारिश की है।
कर्नाटक हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस ऋतू राज अवस्थी की अध्यक्षता वाले 22वें विधि आयोग ने केंद्र सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में आई पीसी की धारा 124A के उपयोग में अधिक स्पष्टता के लिए कुछ संशोधन के साथ इसे बनाए रखने की सिफारिश की है।
अभी धारा 124A के तहत अपराध के लिए आजीवन कारावास या 3 साल की सजा का प्रावधान है लेकिन आयोग ने 3 साल के कारावास को बढ़ा कर 7 साल किये जाने का सुझाव दिया है।
आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ऋतू राज अवस्थी ने इस सन्दर्भ में सीआरपीसी की धारा 196 (3) की तरह सीआरपीसी की धारा 154 में भी एक प्रावधान जोड़े जाने का सुझाव दिया है जो धारा 124 A के तहत अपराध में एफआईआर दर्ज किये जाने से पहले आवश्यक प्रक्रियात्मक सुरक्षा प्रदान करेगा।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में धारा 124A को संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (a) के उल्लंघनकारी होने के तर्क को कई कारणों से ख़ारिज करते हुए कहा है कि किसी किसी क़ानून के दुरूपयोग होने का आरोप उसे वापस लेने का आधार नहीं हो सकता है और इसी तरह औपनिवेशिक विरासत होना भी इसे वापस लेने का वैध आधार नहीं है क्यूंकि भारतीय कानूनी प्रणाली का संपूर्ण ढांचा एक औपनिवेशिक विरासत है।
आयोग के अनुसार ग़ैरक़ानूनी गतिविधियां अधिनियम (UAPA) और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) जैसे कानून धारा 124A के तहत परिकल्पित अपराध के सभी तत्वों को कवर नहीं करते हैं।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केवल इस आधार पर इस प्रावधान को वापस नहीं लिया जा सकता है कि कुछ देशों ने ऐसा किया है क्यूंकि हर देश की क़ानून प्रणाली अलग तरह की परिस्थितियों और वास्तविकताओं से जूझती है।
ग़ौरतलब है कि 11 मई 2022 को तत्कालीन चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने धारा 124A की संवैधानिक वैधता पर निर्णय लेने के बजाए इसे ठन्डे बास्ते में दाल दिया था।
रिपोर्ट यहाँ पढ़ें –