कानूनी शिकंजे से बचने के लिए पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ झूठे आरोपों में मामले दर्ज कराने वालों पर हो सख़्त कार्रवाई: मद्रास हाईकोर्ट

कानूनी शिकंजे से बचने के लिए पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ झूठे आरोपों में मामले दर्ज कराने वालों पर हो सख़्त कार्रवाई: मद्रास हाईकोर्ट

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  • November 24, 2022
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मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने के लिए याचियों पर जुर्माना लगाया है।

जस्टिस एस एम सुब्रमनियम की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है।

मद्रास हाईकोर्ट में एम कला व ए मुथुकुमार ने याचिका दायर कर कोर्ट से प्रतिवादी पुलिस के कुछ अधिकारीयों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश देने की मांग की थी।

प्रतिवादी पुलिस अधिकारीयों ने जवाबी शपथपत्र दायर कर कोर्ट को बताया था कि याची एक अवैध अनाथालय चला रहे थे।

एक नाबालिग बच्चे की गुमशुदगी की शिकायत पर अवैध अनाथालय के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई थी। जिसमे याचियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पुलिस अधिकारीयों ने नाबालिग बच्चे को छुड़ाया था और बच्चे की माँ को उसे एच.सी.पी. संख्या 3725 /2014 में सौंप दिया था।

इस मामले में याची के पुत्र ने राज्य के मानवअधिकार आयोग में भी मामला दर्ज कराया था लेकिन आयोग ने 20 अक्तूबर 2021 मे उस मामले को ख़ारिज कर दिया था। मानवअधिकार आयोग के समक्ष याची के पुत्र किसी मानवाधिकार उल्लंघन को सिद्ध नहीं कर पाए थे।

कोर्ट ने माना कि अपराधियों द्वारा पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ आरोप लगाने के बढ़ते चलन को न्यायालय किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं करेगा।

कोर्ट ने कहा कि हाल के दिनों में पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ बिना किसी आधार के याचिका दायर करने की प्रथा में अनावश्यक रूप से वृद्धि हो रही है।

कोर्ट ने कहा कि जब भी पुलिस अधिकारी कानून के तहत और प्रक्रियाओं के पालन में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हैं तो ये अपराधी क़ानून के शिकंजे से बचने के लिए झूठे आरोपों के साथ इन अधिकारीयों के खिलाफ याचिकाएं दायर करते हैं। ऐसे आरोप अगर झूठे पाए जाते हैं या साबित नहीं होते हैं तो ऐसे में सख्त कार्रवाई की ज़रूरत है।

कोर्ट ने माना कि अगर ऐसी याचिकाओं को लंबित रखा जाता है तो ज़मीनी स्तर के पुलिस कर्मियों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव पड़ेंगे।

कोर्ट ने माना कि इस से पुलिस कर्मियों के सेवा लाभ भी प्रभावित होंगे। इस लिए ऐसी झूटी और ग़लत याचिकाओं का शीध्र निस्तारण किया जाए।

कोर्ट ने याचिका को ख़ारिज करने का आदेश देते हुए याचियों पर 35 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

कोर्ट ने आदेश में कहा के जुर्माने की रक़म से प्रतिवादी 7 पुलिस कर्मियों में से हर एक को 5000 – 5000 हज़ार रुपए का भुगतान किया जाएगा।

केस टाइटल – एम कला बनाम स्टेट ऑफ़ तमिलनाडु डब्ल्यू पी संख्या 26630/2017

पूरा आदेश यहाँ पढ़ें –

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