योगी के मुख्यमंत्री पद पर सवाल उठाने वाली याचिका ख़ारिज, इलाहबाद हाईकोर्ट ने याची पर लगाया जुर्माना
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- November 17, 2022
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इलाहबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने रहने पर सवाल उठाने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है।
याची का आरोप था कि आदित्यनाथ निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 4A के तहत प्रावधानों के उल्लंघन के कारण विधान सभा चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे।
जस्टिस ए रहमान मसऊदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ल की पीठ ने याचिका को ख़ारिज करते हुए माना कि इसी तरह की एक याचिका पूर्व में भी दायर की गयी थी।
पीठ ने अदालत का समय नष्ट करने के लिए याची पर 11 हज़ार रूपए का जुर्माना भी लगाया है।
पीठ ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि इस मामले पर विचार करने के बाद कोर्ट को यह याचिका बड़ी दिलचस्प लगती है और ऐसा लगता है कि याची को इस तरह की याचिका दायर करने की होड़ है।
याचिका की योग्यता पर विचार करते हुए कोर्ट ने माना कि “लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 80 के अनुसार कोई भी निर्वाचन इस भाग के उपबंधों के अनुसार उपिस्थत की गई निर्वाचन अर्ज़ी द्वारा प्रश्नगत किये जाने के सिवाय प्रश्नगत न किया जाएगा“।
मुख्यमंत्री द्वारा दाखिल किये गए शपथ पत्र को आधार मान कर याची ने राहत मांगी थी।
याची का आरोप था कि शपथ पत्र नियमों के प्रावधानों के अनुसार नहीं है।
इसी आधार पर याची का दावा था कि आदित्यनाथ का विधान सभा सदस्य के रूप में चुनाव कानूनी नहीं था।
कोर्ट ने माना कि याची के तर्क सिर्फ अनुमान पर आधारित थे क्यूंकि प्रतिवादी द्वारा निर्वाचनों का संचालन नियम, 1961 के नियम 4A के तहत दाखिल किये गए शपथ पत्र के अलावा याची ऐसा एक भी दस्तावेज़ पेश करने में नाकाम रहा जो यह सिद्ध कर सके कि प्रतिवादी का चुनाव किसी भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा उचित न पाया गया हो।