“नाम चुनना और रखना नागरिक का मूल अधिकार” इलाहबाद हाईकोर्ट ने परिवर्तित नाम से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र जारी करने का दिया आदेश

“नाम चुनना और रखना नागरिक का मूल अधिकार” इलाहबाद हाईकोर्ट ने परिवर्तित नाम से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र जारी करने का दिया आदेश

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  • May 31, 2023
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इलाहबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र में नाम परिवर्तन के संबंध में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है।

कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद् के सचिव के आदेश को रद्द करते हुए याची को परिवर्तित नाम से प्रमाण पत्र जारी किये जाने का आदेश दिया है।
जस्टिस अजय भनोट की पीठ इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमे याची ने अपना नाम शाहनवाज़ के स्थान पर एमडी समीर राव किये जाने की मांग की थी।

कोर्ट ने सचिव के 24 दिसंबर 2020 को जारी आदेश को रद्द करते हुए परिवर्तित नाम के साथ याची को हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (a) और 21 में निहित मौलिक अधिकार प्रत्येक नागरिक को नाम रखने और बदलने का अधिकार देता है।

इस मामले में माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा वर्ष 2013 और 2015 में जारी क्रमशः हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्रों में याची का नाम शाहनवाज़ दर्ज था। याची ने 2020 में धर्मपरिवर्तन कर अपना नाम शाहनवाज़ से बदल कर एमडी राव कर लिया था जिसके बाद याची ने परिषद् से परिवर्तित नाम से प्रमाण पत्र जारी किये जाने की अर्ज़ी दी थी। लेकिन परिषद् ने इंटरमीडिएट रेग्युलेशन 40 का हवाला देकर याची के नाम बदलने की अर्ज़ी को ख़ारिज कर दिया था।

रेग्युलेशन 40 के अनुसार परीक्षा देने के 3 वर्ष के भीतर ही परीक्षार्थी को नाम में परिवर्तन करने करने की अनुमति है।

कोर्ट ने इंटरमीडिएट रेग्युलेशन 40 को संविधान के अनुच्छेद 25 के विपरीत करार देते हुए सचिव के आदेश को ख़ारिज कर दिया और याची को परिवर्तित नाम से प्रमाण जारी करने का आदेश दिया।

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