सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (2014 ) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को किया ख़ारिज

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (2014 ) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को किया ख़ारिज

पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (2014 ) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को ख़ारिज कर दिया है। इस तरह अब प्रदेश की गुरुद्वारा समिति राज्यों के सभी गुरुद्वारों को नियन्त्ररित करने के लिए स्वतंत्र होगी।

इस से पूर्व पंजाब ,हरियाणा ,हिमाचल और चंडीगढ़ की सभी गुरुद्वारा समितियां सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के अंतर्गत कार्य करती थीं लेकिन 2014 के हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक एक्ट के बाद हरियाणा की गुरुद्वारा समिति राज्य द्वारा बनाये गए एक्ट के अधीन हो गयी थीं।

2014 में हरियाणा सरकार द्वारा लाये गए एक्ट की वैधता को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यह तर्क देते हुए चुनौती दी गयी थी कि हरियाणा सरकार द्वारा लाया गया 2014 का एक्ट पंजाब रिऑर्गनाईज़ेशन एक्ट, 1966 की धारा 72 के उल्लंघन पर आधारित है जिसमे इस तरह के एक्ट बनाने का अधिकार राज्य नहीं बल्कि केंद्र के पास है।

2014 में सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के सदस्य हरभजन सिंह ने हरियाणा सरकार के इस एक्ट संवैधानिक वैधता के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। 2019 में सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति द्वारा भी इसी प्रकार की एक अपील सुप्रीम में दायर की गयी थी। याचिका में राज्य सरकार पर धार्मिक मामलों में दखल अंदाज़ी का आरोप लगाते हुए कहा गया था कि इस तरह के एक्ट बनाने का अधिकार लोकसभा के पास है न कि राज्य सरकार के पास।

याचिकाकर्ताओं ने ये भी कहा था कि इस प्रकार के एक्ट का उद्देश्य समुदाय को बाटने का एक प्रयत्न है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विक्रम नाथ की खंडपीठ ने हरियाणा सरकार द्वारा लाये गए 2014 के एक्ट कीसंवैधानिक वैधता को बरक़रार रखते हुए उसे चुनौती देने वाली अपीलों को यह कह कर ख़ारिज कर दिया कि 2014 का एक्ट सिखों के धार्मिक मामलों को विशेष रूप से सिखों के हाथों में सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 के तहत ही देता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि क्यों कि सिख अल्पसंख्यक समुदाय के मामलों का प्रबंधन सिखों द्वारा ही किया जाना है इस लिए इसे संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के अंतर्गत दिए गए मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी नहीं कहा जा सकता।

ज्ञात हो कि हरियाणा में अभी कुल 52 गुरूद्वारे हैं जिसमे 5 हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (HSGPC ) के अधीन हैं जबकि अन्य गुरुद्वारों का प्रबंधन सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC ) के अधीन है।

Download “The Haryana Sikh Gurdwara Management Act, 2014” here:

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