सुप्रीम कोर्ट ने निजी हज समूह आयोजकों (HGOs) के पंजीकरण प्रमाण पत्र के निलंबन पर लगी रोक के आदेश के खिलाफ सुनवाई से किया इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने निजी हज समूह आयोजकों (HGOs) के पंजीकरण प्रमाण पत्र के निलंबन पर लगी रोक के आदेश के खिलाफ सुनवाई से किया इंकार

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  • June 19, 2023
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करने से इंकार दिया जिसमे निजी हज समूह आयोजकों (HGOs) के पंजीकरण प्रमाण पत्र के निलंबन पर रोक लगा दी गई थी।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एमएम सुंदरेश की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन का तर्क था कि अगर निजी ऑपरेटरों को हज यात्रा पर ले जाने की अनुमति दी जाती है तो इस से परेशानी अंततः हज यात्रियों को ही उठानी पड़ेगी।

कोर्ट ने इस बात के मद्देनज़र कि इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ आगामी 7 जुलाई को सुनवाई करने वाली है इस में हस्तक्षेप करने से इंकार दिया।

सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर एएसजी ने विस्तार से कहा कि ” एक व्यवस्था के तहत सऊदी अरब की सरकार हज का एक कोटा प्रदान करती है। जिसका 80 प्रतिशत भारत की हज समिति को जाता है। शेष हज समूह आयोजकों के माध्यम से संचालित किया जाता है। इन आयोजकों को कुछ मानदंडों को पूरा करना होता है। मई के महीने में ऐसे 512 आयोजकों को स्वीकृति दी गई थी। 25 मई को हमें उनमें से कुछ के खिलाफ गंभीर शिकायत मिली। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।”

कोर्ट के समक्ष एएसजी ने कहा कि “हम हज यात्रियों को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करना चाहते हैं। उन्हें जेब से कुछ अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ेगा। उनकी यात्रा अन्य एचजीओ को दी जाएगी। भारत सरकार उन्हें वित्तीय गारंटी दे रही है।”

खंडपीठ इस मामले पर विचार करने के लिए अनिच्छुक थी।

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि “इन सभी विवादों को हाई कोर्ट द्वारा निपटाया जाएगा। हजयात्रियों को मुकदमेबाजी के किसी भी मनोवैज्ञानिक दबाव के बिना हज पर जाने दें। आपके लिए यह बुद्धिमानी होगी कि आप उनके (एचजीओ) के खिलाफ तब तक कोई कार्रवाई न करें जब तक कि वे वापस आते हैं। वे लंबे समय तक सऊदी अरब में नहीं रहेंगे।”

ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 25 मई को जारी हज कोटा के आवंटन की समेकित सूचि में हज 2023 के लिए निजी हज समूह आयोजकों (HGOs) के पंजीकरण प्रमाण पत्र को निलंबित कर दिया था। जिसके बाद 26 मई को इन आयोजकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया गया था।

केंद्र के आदेश के खिलाफ आयोजकों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसके बाद हाई कोर्ट ने निलंबन के आदेश पर रोक लगा दी थी।

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