हाई कोर्ट ने अग्रिम ज़मानत के लिए पत्नी को 10 लाख रूपये देने की रखी शर्त, सुप्रीम कोर्ट ने शर्त को तर्कसंगत न मानकर रद्द कर दिया आदेश
- Hindi
- October 28, 2022
- No Comment
- 946
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में शर्तों के साथ अग्रिम ज़मानत से संबंधित झारखण्ड हाई कोर्ट के एक आदेश को रद्द कर दिया है।
झारखण्ड हाई कोर्ट ने आरोपी पति को पत्नी के नाम अस्थायी रूप से पीड़ित मुआवज़े के तौर पर एक 10 लाख का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने की शर्त पर अग्रिम ज़मानत देने का आदेश दिया था।
अपीलकर्ता ने झारखण्ड हाई कोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
क्या है मामला ?
यह दो लोगों के बीच एक वैवाहिक विवाद का मामला है। जिनका विवाह हिन्दू रीति-रिवाज द्वारा 11 जून 2015 को हुआ था।
बाद में वैवाहिक मदभेदों के कारण अपीलकर्ता (पति) ने 8 जुलाई 2016 को विवाह भंग करने हेतु आवेदन किया था।
फिर प्रतिवादी (पत्नी) ने अपीलकर्ता (पति) के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष 27 जुलाई 2017 को आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी, जो बाद में 22 फरवरी 2018 को FIR (No 3055 of 2018) में बदल गयी थी।
FIR में अपीलकर्ता के खिलाफ आई पी सी की धारा 498 A, 120B, 323, 324 और दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था।
असंज्ञेय अपराध होने के कारण अपीलकर्ता ने हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी दी थी।
हाई कोर्ट ने ज़मानत आवेदन के पैरा 8 के अनुसार वैवाहिक जीवन फिर शुरू करने की शर्त पर अपीलकर्ता को ज़मानत दे दी थी।
लेकिन ऐसा संभव न होने पर हाई कोर्ट ने सी आर पी सी की धारा 482 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए अपीलकर्ता को अग्रिम ज़मानत के लिए एक 10 लाख रूपये का डिमांड ड्राफ्ट पत्नी के नाम अस्थायी पीड़ित मुआवज़े के तौर पर जमा करने का आदेश दिया था।
पीठ ने गिरफ़्तारी पूर्व ज़मानत का लाभ पाने के लिए हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्त को तर्कसंगत ना पाकर आदेश को रद्द कर दिया था।
क्या कहती है सी आर पी सी की धारा 482?
उच्च न्यायालय की अंतनिर्हित शक्तियों की व्यावृति –
इस संहिता की कोई बात उच्च न्यायालय की ऐसे आदेश देने की अंतनिर्हित शक्ति को सीमित या प्रभावित करने वाली न समझी जाएगी जिसे इस संहिता के अधीन किसी आदेश को प्रभावी करने के लिए या किसी न्यायालय की कार्यवाही का दुरूपयोग निवारित करने के लिए या किसी अन्य प्रकार से न्याय के उद्देश्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो।
केस टाइटल – रविकांत श्रीवास्तव @ रवि कांत श्रीवास्तव बनाम स्टेट ऑफ़ झारखण्ड (CRIMINAL APPEAL NO(S). 1803 OF 2022)(@ SPECIAL LEAVE PETITION (CRL.) NO. 1771 OF 2022)
पूरा आदेश यहाँ पढ़ें –