समलैंगिक विवाह का मामला: केंद्र के पत्र पर 7 राज्य सरकारों ने दी अपनी प्रतिक्रियाएं, राजस्थान ने किया विरोध, बाक़ी ने माँगा समय
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- May 10, 2023
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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सिर्फ 7 राज्यों ने केंद्र द्वारा 18 अप्रैल को लिखे गए पत्र पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। पत्र में राज्यों से समलैंगिक विवाह के मूल मुद्दों पर उनकी टिप्पणियां और विचार मांगे गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस हिमा कोहली, जस्टिस एस रविंद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की संवैधानिक पीठ समलैंगिक विवाह को क़ानूनी रूप से मान्यता देने के लिए दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
पीठ के समक्ष आज सुनवाई के 9वें दिन मेहता ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि ” मैंने शुरुआत में कहा था कि हम ने राज्य सरकारों को पत्र लिखा है। हमें 7 राज्यों (मणिपुर, आँध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, असम, सिक्किम और राजस्थान) से प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं। राजस्थान ने कहा है कि उसने इस मुद्दें की जांच की है और वह इसके विरोध में है। बाकी सभी ने कहा है कि उन्हें गहन और विस्तृत बहस की जरूरत है। हमें यह सब प्राप्त हुए हैं। मैं इन्हें रिकॉर्ड पर रखूंगा।”
इस मामले की सुनवाई के आरंभ में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से सभी राज्यों को इन याचिकाओं में पक्षकार बनाने की मांग की थी। क्यूंकि विवाह, तलाक़ और गोद लेने जैसे अन्य सभी संबधित मुद्दे संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची के तहत आते हैं।
पीठ के समक्ष केंद्र के पक्ष में प्रस्तुति में कहा गया था कि “स्पष्ट है कि प्रत्यायोजित विधानों के माध्यम से इस विषय पर किसी भी निर्णय से राज्यों के अधिकार विशेष रूप से इस विषय पर क़ानून बनाने के अधिकार प्रभावित होंगे। इस लिए उन्हें वर्तमान मामले में सुनवाई के लिए एक आवश्यक और उचित पक्षकार बनाया जाए। “
पीठ ने इस मामले में राज्यों को नोटिस जारी कर सुनवाई को टालने की केंद्र सरकार की मांग को यह कह कर ख़ारिज कर दिया था कि राज्य इस मामले की कार्यवाही में शामिल होने के लिए स्वतंत्र हैं।